शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

 रेक्टिफायर (Rectifier)

एसी (AC) को डीसी (DC) में बदलने (Convert) वाली  इलेक्ट्रॉनिक युक्ति (Electronic component) रेक्टिफायर (Rectifier) कहलाती है एसी (AC) को डीसी (DC) में परिवर्तन की क्रिया रेक्टिफिकेशन (Rectification) कहलाती है |

इसमें सर्वप्रथम एक स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर (Step down transformer) लगा होता है जो एसी वोल्टेज (AC Voltage) को स्टेप डाउन Step down) करता है तथा रेक्टिफायर (Rectifier) में भेजता है फिर रेक्टिफायर जो कि डायोड (diode) से बना होता है उसे डीसी में परिवर्तित करता है इसके बाद प्राप्त डीसी को फिल्टर (Filter) से गुजारा जाता है फिल्टर में गुजारने के पश्चात पलसेटिंग डीसी (pulsating DC) प्राप्त होती है जिसे एक रेगुलेटर (Regulator) द्वारा रेगुलेटेड किया जाता है |इस प्रकार रेगुलेटर की आउटपुट पर शुद्ध रेगुलेटेड डीसी वोल्टेज प्राप्त होती है |







 



  •  रेक्टिफायर सर्किट ( Rectifier circuit)

  रेक्टिफायर परिपथ मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं |

  • हाफबेव रेक्टिफायर (Half wave Rectifier)
  • फुलबेव  रेक्टिफायर(Full wave Rectifier)
  • ब्रिज   रेक्टिफायर( Bridge Rectifier)


हाफबेव रेक्टिफायर (Half wave Rectifier) 

हाफवेब रेक्टिफायर ( half wave Rectifier) में केवल एक डायोड प्रयोग किया जाता है इनपुट AC  voltage आरोपित होने पर जब डायोड का एनोड धनात्मक होता है तो परिपथ में से विद्युत धारा प्रवाहित होती है परंतु नोड ( node) के ऋणात्मक (negative) होने पर परिपथ (Circuit) में से विद्युत धारा (Electric current) प्रवाहित नहीं होती है|इस प्रकार प्रत्येक AC चक्र का  ऋण विलुप्त अर्थात रेक्टिफाई हो जाता है और आउटपुट में केवल धन (+) अर्ध्द चक्र( half cycle) ही उपस्थित होते हैं|यह डीसी आउटपुट घटते बढ़ते स्वभाव वाला अर्थात पलसेटिंग ( pulsating) होता है|आउटपुट में फिल्टर परिपथ का प्रयोग करके पलसेटिंग डीसी को शुद्ध DC में परिवर्तित कर लिया जाता है |








फुलबेव  रेक्टिफायर(Full wave Rectifier)


इस रेक्टिफायर में दो डायोड्स तथा एक ऐसा मेन ट्रांसफार्मर प्रयोग किया जाता है , जिसकी सेकेंडरी वाइंडिंग में से एक मध्य संयोजक सिरा निकाला गया हो| मध्य सिरे को ग्राउंड कर दिया जाता है| इसे सेंटर टैप्ड ट्रांसफार्मर कहते हैं |तथा अर्ध्द AC चक्र में  जब सेकेंडरी वाइंडिंग का सिरा -1 धन (+) होता है तो डायोड D1 कार्य करता है और डीसी आउटपुट प्रदान करता है|

दूसरे अर्ध्द AC चक्र में जब सेकेंडरी वाइंडिंग का सिरा-3 धन होता है, तो डायोड D2 कार्य करता है और डीसी आउटपुट प्रदान करता है | इस प्रकार, AC इनपुट के प्रत्येक चक्र के दोनों अर्ध्द- चक्रो के लिए डीसी आउटपुट प्राप्त होती है और इसलिए ही यह फुल वेव रेक्टिफायर कहलाता है |







 ब्रिज रेक्टिफायर( Bridge Rectifier)

इस रेक्टिफायर में 4 डायोड प्रयोग किए जाते हैं और इसमें किसी मध्य सिर आयुक्त मेन ट्रांसफार्मर की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए इसका आकार तथा मूल्य कम होता है |







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